FCRA संशोधन विधेयक 2026 संसद में पेश, ₹20,000 करोड़ की Foreign Funding पर कड़ी निगरानी

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नई दिल्ली: विदेशी चंदे  (Foreign Funding) के नियमन को और कड़ा बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में एफसीआरए (FCRA- Foreign Contribution Regulation Act) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया। सरकार का कहना है कि यह बिल विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने, दुरुपयोग रोकने और अनुपालन (कम्प्लायंस) को मजबूत करने के लिए लाया गया है। हालांकि, बिल पेश होते ही विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए इसे संवैधानिक रूप से चिंताजनक बताया।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक 2026?

यह विधेयक Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव का प्रस्ताव करता है, जो देश में NGOs और संस्थाओं द्वारा विदेशी फंड प्राप्त करने और उसके उपयोग को नियंत्रित करता है।

सरकार का दावा है कि यह संशोधन नियमों में मौजूद खामियों को दूर करेगा और फंड के इस्तेमाल को अधिक जवाबदेह बनाएगा।

लोकसभा में पेश, विपक्ष का विरोध

गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai ने यह बिल लोकसभा में पेश किया।

बिल में प्रावधान है कि एफसीआरए लाइसेंस रद्द, सरेंडर या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों को सरकार अपने नियंत्रण में ले सकेगी
यानी ऐसे मामलों में केंद्र सरकार को संपत्तियों के प्रबंधन, हस्तांतरण और निपटान का अधिकार मिलेगा

इस पर कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने कड़ा विरोध दर्ज किया।

विपक्ष ने उठाए संवैधानिक सवाल

मनीष तिवारी ने नियम 72 के तहत बिल का विरोध करते हुए कहा कि:

यह विधेयक अत्यधिक शक्तियां कार्यपालिका (सरकार) को सौंपता है
संपत्ति के प्रबंधन, निपटान, समयसीमा और अपील जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे कानून में स्पष्ट नहीं हैं, बल्कि बाद में नियमों के जरिए तय किए जाएंगे
इससे संसद की भूमिका केवल “औपचारिक ढांचा” बनाने तक सीमित हो जाती है

उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रावधान सरकार को संपत्तियों पर व्यापक नियंत्रण देता है, जो संविधान के अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार) के तहत सवाल खड़े करता है।

बिल के प्रमुख प्रावधान
1️⃣ NGOs की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण
लाइसेंस रद्द या समाप्त होने पर सरकार विदेशी फंड से बनी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले सकेगी
इससे संपत्तियों के दुरुपयोग या अवैध हस्तांतरण को रोका जा सकेगा
2️⃣ सख्त अनुपालन और निगरानी
विदेशी फंड के उपयोग के लिए समय-सीमा तय की जा सकती है
रिपोर्टिंग और खुलासे (डिस्क्लोजर) के नियम कड़े होंगे
ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत किया जाएगा
3️⃣ ₹20,000 करोड़ से ज्यादा फंडिंग पर कड़ी नजर

भारत में हर साल आने वाला ₹20,000 करोड़ से अधिक विदेशी फंड अब अधिक सख्ती से निगरानी में रहेगा:

फंड के उपयोग की बेहतर ट्रैकिंग
नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
पारदर्शिता में बढ़ोतरी
4️⃣ दंड प्रावधानों में राहत
छोटे उल्लंघनों के लिए सजा कम करने का प्रस्ताव
फोकस सजा की बजाय अनुपालन सुधारने पर
5️⃣ प्रक्रियाओं को सरल बनाना
नियमों को स्पष्ट और व्यवस्थित किया जाएगा
फाइलिंग और अनुपालन में अस्पष्टता कम होगी

पृष्ठभूमि

एफसीआरए कानून में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं:

2010: मूल कानून लागू हुआ
2020 संशोधन: नियमों को और सख्त किया गया
इसके बाद भी रिपोर्टिंग और ऑडिट नियमों को मजबूत किया गया

2026 का यह संशोधन उसी क्रम में अगला कदम माना जा रहा है।

बिल पास होने पर क्या बदलेगा?

अगर यह विधेयक संसद से पास हो जाता है, तो:

  • सरकार को NGOs की संपत्तियों का प्रबंधन करने का अधिकार मिलेगा
  • विदेशी फंड के उपयोग पर कड़ी निगरानी और समयबद्ध नियम लागू होंगे
  • ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का पूरा विदेशी फंडिंग सिस्टम कड़े दायरे में आ जाएगा

निष्कर्ष

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 भारत में विदेशी फंडिंग के नियमन को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है। सरकार इसे पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अत्यधिक सरकारी नियंत्रण और संवैधानिक चिंताओं से जुड़ा मामला मान रहा है।

अब नजर इस बात पर होगी कि संसद में बहस के बाद यह विधेयक किस रूप में पारित होता है और इसका देश के NGO सेक्टर पर क्या असर पड़ता है।

 

FCRA संशोधन विधेयक 2026: प्रस्तावित प्रमुख बदलाव 

1️⃣ NGOs की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि केंद्र सरकार को NGOs की विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर नियंत्रण लेने का अधिकार मिलेगा।

अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द, सरेंडर, समाप्त या नवीनीकरण नहीं होता है, तो उसकी संपत्तियां एक “डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी” को सौंप दी जाएंगी।
यह अथॉरिटी इन संपत्तियों को पहले अस्थायी रूप से संभालेगी और बाद में इन्हें स्थायी रूप से सरकारी नियंत्रण में लाया जा सकता है

2️⃣ संपत्तियों को ट्रांसफर या बेचने की शक्ति

सरकार को यह अधिकार भी मिलेगा कि वह ऐसी संपत्तियों को:

  • किसी सरकारी विभाग को ट्रांसफर कर दे, या
  • उन्हें बेच दे

बेचने पर मिलने वाली राशि भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा होगी।
इसे बिल का सबसे सख्त प्रावधान माना जा रहा है।

3️⃣ संस्था बंद होने पर संपत्तियां सरकार के पास जाएंगी

अगर कोई NGO बंद हो जाता है, निष्क्रिय हो जाता है या अस्तित्व खत्म हो जाता है, तो उसकी विदेशी फंड से बनी सभी संपत्तियां स्थायी रूप से सरकार के पास चली जाएंगी

4️⃣ FCRA रजिस्ट्रेशन का स्वतः रद्द होना

अब कुछ स्थितियों में रजिस्ट्रेशन अपने आप समाप्त हो जाएगा, जैसे:

  • समय पर नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करना
  • नवीनीकरण आवेदन खारिज होना
  • वैधता अवधि खत्म होना

ऐसी स्थिति में संस्था न तो विदेशी फंड ले सकेगी और न ही उसका उपयोग कर पाएगी

5️⃣ विदेशी फंड के उपयोग के लिए तय समयसीमा

अब सरकार विदेशी फंड के प्राप्ति और उपयोग के लिए समयसीमा तय करेगी

इसका मतलब है कि संस्थाएं अब फंड को अनिश्चित समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगी

6️⃣ जांच पर केंद्र सरकार का पूरा नियंत्रण

बिल में प्रावधान है कि FCRA से जुड़ी किसी भी जांच की शुरुआत केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना नहीं हो सकेगी

इससे जांच प्रक्रिया पूरी तरह केंद्रीय नियंत्रण में आ जाएगी

7️⃣ जिम्मेदारी सिर्फ संस्था नहीं, व्यक्तियों पर भी

अब कानून के उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी केवल संस्था की नहीं होगी, बल्कि:

  • निदेशक (Directors)
  • ट्रस्टी (Trustees)
  • गवर्निंग बॉडी के सदस्य
  • पदाधिकारी और प्रबंधन से जुड़े लोग

सभी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा

8️⃣ निलंबन के दौरान सख्त प्रतिबंध

अगर किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन निलंबित होता है, तो:

  • वह अपनी संपत्तियों को बेच, ट्रांसफर या गिरवी नहीं रख सकेगी
  • इसके लिए पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी

9️⃣ सजा में कमी, ‘तर्कसंगत’ बदलाव

बिल में सजा को कम करने का प्रस्ताव भी है:

  • अधिकतम सजा 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है
  • जुर्माना या दोनों का प्रावधान रहेगा

सरकार इसे “तर्कसंगत सुधार (rationalisation)” बता रही है, जहां फोकस सजा से ज्यादा अनुपालन पर होगा।

Ashis Sinha

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