New Delhi: Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स (Kirana Hills) इलाके में भारतीय ड्रोन (Drone) के पहुंचने को लेकर चल रहा रहस्य अब कुछ हद तक साफ होता दिख रहा है। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बताया है कि एक भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन ने किराना हिल्स इलाके में असर किया था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि किराना हिल्स भारतीय सेना का निर्धारित लक्ष्य नहीं था।
चौहान के अनुसार, भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन को पाकिस्तान के सरगोधा (Sargodha) क्षेत्र में रडार सिस्टम (Rader System) तलाशने के लिए भेजा गया था। इनमें से एक ड्रोन अपने निर्धारित लक्ष्य को खोज नहीं पाया और ईंधन खत्म होने के बाद किराना हिल्स इलाके में जा गिरा।
रडार तलाशने निकला था ड्रोन
चौहान ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान सरगोधा के आसपास कई लॉइटरिंग म्यूनिशन तैनात किए गए थे। इनका मकसद पाकिस्तानी रडार और अन्य सैन्य ठिकानों की पहचान करना था।
ऐसे हथियार सीमित समय तक हवा में रहकर लक्ष्य की तलाश कर सकते हैं। यदि निर्धारित समय में लक्ष्य नहीं मिलता, तो उनकी उड़ान क्षमता समाप्त हो जाती है। चौहान के मुताबिक, इसी तरह एक भारतीय म्यूनिशन का ईंधन खत्म हुआ और वह किराना हिल्स क्षेत्र में गिर गया।
इससे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स के आसपास दिखाई दिए धुएं और संभावित प्रभाव को लेकर उठे सवालों को एक नया संदर्भ मिलता है।
“At occasions, it’s been asked whether Kirana Hills were hit or not, which is where Pakistan’s nuclear facilities are… Before those strikes, we had sent in a lot of loitering missions at Sargodha and Kirana Hills is about 10 kilometers north of Sargodha. So the loitering… pic.twitter.com/nUMqT1CVLZ
— WION (@WIONews) August 25, 2026
IAF ने पहले कहा था—किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया
किराना हिल्स को लेकर यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले ही इस इलाके को निशाना बनाए जाने से इनकार कर चुकी थी।
12 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर पर आधिकारिक ब्रीफिंग के दौरान तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ एयर ऑपरेशंस एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया था।
उनका बयान उस समय सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में किए जा रहे उन दावों के बीच आया था, जिनमें किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए वहां भारतीय हमले की बात कही गई थी।
जनरल चौहान की नई टिप्पणी इस मामले में एक अहम अंतर स्पष्ट करती है—किराना हिल्स को निशाना बनाना और वहां किसी हथियार का अनजाने में गिरना दो अलग बातें हैं।
किराना हिल्स क्यों है संवेदनशील?
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा के पास स्थित किराना हिल्स का नाम लंबे समय से पाकिस्तान के रणनीतिक और परमाणु-संबंधी बुनियादी ढांचे के संदर्भ में लिया जाता रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस इलाके की चर्चा तब तेज हुई जब वहां से धुआं उठने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। बाद में सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में भी इलाके में संभावित प्रभाव के संकेतों की बात सामने आई।
हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई कि किसी परमाणु हथियार भंडार या परमाणु सुविधा को नुकसान पहुंचा था।
क्या बदला है चौहान के बयान से?
पूर्व CDS के बयान से किराना हिल्स मामले में एक संभावित ऑपरेशनल तस्वीर सामने आती है।
इसके मुताबिक भारतीय म्यूनिशन का मूल मिशन सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडार की तलाश करना था। वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया और उड़ान की क्षमता समाप्त होने के बाद किराना हिल्स क्षेत्र में गिर गया।
इसलिए इसे पाकिस्तान की परमाणु सुविधा पर भारत के जानबूझकर किए गए हमले के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
भारत ने शुरुआत में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर हमले किए। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव बढ़ा और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
ऑपरेशन सिंदूर ने ड्रोन, मिसाइल और अन्य स्वदेशी तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल को भी प्रमुखता से सामने लाया।
निष्कर्ष
जनरल अनिल चौहान के बयान ने किराना हिल्स की पहेली में एक महत्वपूर्ण कड़ी जरूर जोड़ दी है।
उनके मुताबिक, एक भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन ने किराना हिल्स इलाके में असर किया था, लेकिन यह कोई नियोजित हमला नहीं था। ड्रोन सरगोधा क्षेत्र में रडार की तलाश के मिशन पर था और कथित तौर पर ईंधन खत्म होने के बाद वहां गिर गया।
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि किराना हिल्स इलाके में भारतीय म्यूनिशन का प्रभाव हुआ था, लेकिन इसे पाकिस्तान की परमाणु सुविधा पर भारत के जानबूझकर किए गए हमले की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

