रांची : झारखंड में अब तक के सबसे बड़े शराब घोटाले का पर्दाफाश हो चुका है। राज्य सरकार ने आबकारी विभाग के 22 अफसरों को सस्पेंड कर दिया है, जबकि 7 रिटायर्ड अफसरों को भी आरोपी बनाया गया है। ये कार्रवाई EOW और ACB की 2300 पन्नों की चार्जशीट के बाद हुई है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस घोटाले में नीतिगत गड़बड़ियों, राजनीतिक संरक्षण और बाहरी राज्यों की संलिप्तता की परतें खुलती जा रही हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
इस घोटाले की जड़ें 2021 के आखिर में पड़ीं, जब झारखंड में नई शराब नीति (2022-23) लाने की तैयारी चल रही थी। कहा गया कि इस नीति पर छत्तीसगढ़ के शराब माफिया का असर हो सकता है।
आबकारी विभाग ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSML) को कंसल्टेंट बना दिया और अरुणपति त्रिपाठी को ₹1.25 करोड़ की फीस दी गई। लेकिन रेवेन्यू काउंसिल के सदस्य अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने इस फैसले का विरोध किया और पूछा कि जो एजेंसी अपने राज्य में शराब राजस्व नहीं संभाल सकी, उसे झारखंड में क्यों लाया गया?
उनकी आपत्ति अनदेखी कर दी गई और यहीं से भ्रष्टाचार का सिलसिला शुरू हो गया।
क्या है ‘बी-पार्ट’ शराब घोटाला?
2019 से 2023 के बीच झारखंड के 15 जिलों में सरकारी दुकानों से बिना टैक्स की देशी शराब बेची गई, जिसे ‘बी-पार्ट’ शराब कहा गया।
ये शराब सरकारी स्टॉक की आड़ में बेची जाती थी, लेकिन उससे मिलने वाला टैक्स सरकार को नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क को जाता था, जिसमें डिस्टिलरी, ट्रांसपोर्टर, अफसर, प्राइवेट एजेंसियां और बड़े नेता शामिल थे।
अब तक 60 लाख से ज्यादा क्रेट अवैध शराब बेची जा चुकी है। पहले घोटाले की रकम ₹2174 करोड़ आंकी गई थी, अब ये बढ़कर ₹3200 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
सरकार ने जिन 22 अफसरों को सस्पेंड किया है, उनमें ये नाम प्रमुख हैं:
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जनार्दन कौरव
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अनीमेश नेताम
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विजय सेन शर्मा
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इकबाल खान
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नीतू नोतानी ठाकुर
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सोनल नेताम
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राजेश जायसवाल
वहीं 7 रिटायर्ड अफसरों में ए.के. सिंह, जे.आर. मंडावी, देवलाल वैष और एल.एल. ध्रुव शामिल हैं, जिन्हें आपराधिक साजिश और मिलीभगत का आरोपी बनाया गया है।
क्या पूर्व मंत्री ने लिए ₹64 करोड़?
जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा को घोटाले से ₹64 करोड़ की अवैध कमाई हुई। कहा जा रहा है कि उन्होंने इस नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण दिया।
वहीं, CSML से जुड़े अमित प्रकाश की गिरफ्तारी से साफ है कि अब जांच नीति बनाने वालों और राजनीतिक आकाओं तक पहुंच रही है।
कोर्ट का सख्त रुख
अब तक EOW के समन के बावजूद 29 आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। कोर्ट ने उन्हें 20 अगस्त तक का आखिरी मौका दिया है।
अब तक की जांच
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13 गिरफ्तारियां
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70 नामजद आरोपी
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4 चार्जशीट दायर
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जांच अभी जारी, आगे विदेशी शराब, मनी लॉन्ड्रिंग और नेताओं की संलिप्तता की परतें खुल सकती हैं।
क्या सामने आएगी पूरी सच्चाई?
ये घोटाला अब सिर्फ एक विभागीय भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि राजनीतिक मिलीभगत, नीति में गड़बड़ी और बाहरी दबाव का बड़ा उदाहरण बन चुका है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि अभी कई और चौंकाने वाले खुलासे बाकी हैं।

