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चंद्रमा पर नहीं उतरेंगे: 4 अंतरिक्ष यात्री 4 लाख KM दूर चंद्रमा के पार जाएंगे
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चंद्र फ्लाईबाय मिशन से अंतरिक्ष में नई छलांग लगाने की तैयारी
मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए NASA ने अपने पहले मानवयुक्त आर्टेमिस मिशन—आर्टेमिस II (Artemis II)—को 1 April को लॉन्च करने की मंजूरी दे दी है। यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पर भेजेगा, हालांकि वे चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं। यह 1972 में Apollo 17 mission के बाद पहली बार होगा जब इंसान गहरे अंतरिक्ष में जाएगा।
चार सदस्यीय दल संभालेगा मिशन की कमान
Artemis II मिशन के लिए 2023 में चुने गए चार सदस्यीय दल में कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover और मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch शामिल हैं। इनके साथ Jeremy Hansen भी मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में जुड़ेंगे, जो Canadian Space Agency का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Action. Wonder. Adventure. Artemis II has got it all. Don’t miss the moment. Our crewed Moon mission will launch as early as April 1.
Learn how to watch: https://t.co/fAg0bGAqEc pic.twitter.com/2uhg8EhwTv
— NASA (@NASA) March 30, 2026
दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट करेगा लॉन्च
यह मिशन ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान के जरिए पूरा किया जाएगा, जिसे 322 फीट ऊंचे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर स्थापित किया गया है। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जिसे Boeing और Northrop Grumman ने विकसित किया है।
अंतरिक्ष यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करते हुए उसके चारों ओर घूमकर वापस पृथ्वी की ओर लौटेगा। इस तरह की तकनीक पहले Artemis I mission और Apollo 13 mission में भी अपनाई जा चुकी है।
गहरे अंतरिक्ष के लिए उन्नत ओरियन कैप्सूल
ओरियन (Orion) कैप्सूल, जिसे Lockheed Martin ने तैयार किया है, पूरी तरह प्रेसराइज्ड है और इसमें पानी, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन जैसी जीवन रक्षक सुविधाएं मौजूद हैं।
जहां आर्टेमिस I मिशन में बिना चालक दल के परीक्षण किया गया था, वहीं आर्टेमिस II में इन सभी प्रणालियों का परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों के साथ किया जाएगा। यह मिशन भविष्य के Artemis III mission के लिए आधार तैयार करेगा, जिसमें इंसानों को चंद्रमा पर उतारने की योजना है।
10 दिन के मिशन में क्या होगा खास
लॉन्च के करीब साढ़े तीन घंटे बाद पायलट विक्टर ग्लोवर अंतरिक्ष यान का नियंत्रण संभालेंगे और इसकी दिशा, गति तथा थ्रस्टर सिस्टम की जांच करेंगे।
इसके बाद दल चंद्रमा के दूर वाले हिस्से तक पहुंचेगा, जो पृथ्वी से लगभग 4,02,000 किलोमीटर दूर होगा—यह दूरी अपोलो 13 मिशन के रिकॉर्ड से भी अधिक है। इस दौरान करीब 50 मिनट तक संचार बाधित रह सकता है।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री:
- जीवन रक्षक प्रणाली, प्रोपल्शन और नेविगेशन का परीक्षण करेंगे
- अपने स्वास्थ्य से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करेंगे
- गहरे अंतरिक्ष की तस्वीरें लेकर पृथ्वी पर भेजेंगे
वापसी और समुद्र में लैंडिंग
चंद्रमा के चारों ओर घूमने के बाद अंतरिक्ष यान गुरुत्वाकर्षण की मदद से पृथ्वी की ओर लौटेगा। नासा के अनुसार, पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के समय इसकी गति करीब 40,200 किमी/घंटा होगी, जो Apollo 10 mission के रिकॉर्ड को पार कर सकती है।
इसके बाद पैराशूट की मदद से कैप्सूल कैलिफोर्निया के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा। एयरबैग्स इसे स्थिर करेंगे और फिर रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालेगी।
चंद्रमा पर वापसी की दिशा में बड़ा कदम
आर्टेमिस II मिशन को मानव अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक अहम परीक्षण माना जा रहा है। इसकी सफलता भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति और मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी।
क्या है “चंद्र फ्लाईबाय”?
चंद्र फ्लाईबाय (Lunar Flyby) एक ऐसी अंतरिक्ष तकनीक है, जिसमें अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह पर उतरता नहीं है, बल्कि उसके चारों ओर घूमते हुए उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करके आगे बढ़ता है या वापस पृथ्वी की ओर लौट आता है।
इस प्रक्रिया में:
- यान चंद्रमा के पास से होकर गुजरता है
- उसकी कक्षा में अस्थायी रूप से प्रवेश करता है या उसके चारों ओर चक्कर लगाता है
- फिर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से गति लेकर “स्लिंगशॉट” की तरह वापस लौटता है
यह तरीका ईंधन बचाने और लंबी दूरी के अंतरिक्ष मिशनों को सुरक्षित बनाने में मदद करता है।
सरल शब्दों में:
चंद्र फ्लाईबाय ऐसा है जैसे कोई वाहन बिना रुके किसी मोड़ से घूमकर अपनी दिशा बदल ले—बस अंतरिक्ष में यह काम चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से होता है।

