1983 के नेली (Neilli) नरसंहार की सच्चाई सार्वजनिक की जाए: PPFA

1983 के नेली (Neilli) नरसंहार की सच्चाई सार्वजनिक की जाए: PPFA
69 / 100 SEO Score

 

नव ठाकुरिया

गुवाहाटी: देशभक्त नागरिकों के संगठन पैट्रियोटिक पीपल्स फ्रंट असम (PPFA) ने असम सरकार द्वारा विधानसभा में नेली (Neilli) नरसंहार से जुड़ी तिवारी (Tiwary) आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्णय का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि 1983 में घटी इस भयावह घटना की वास्तविक सच्चाई अब देश के सामने आनी चाहिए।

PPFA ने अपने बयान में कहा कि यह समय है जब असमिया समाज को ‘मुस्लिम-विरोधी’ बताने की कोशिशों को तथ्यों के जरिए नकारा जाए और वर्षों से फैलाई जा रही नकारात्मक छवि को मिटाया जाए।

18 फरवरी 1983 को नेली क्षेत्र में हुआ यह नरसंहार दुनिया के सबसे भीषण जनसंहारों में से एक माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा में 2,000 से अधिक बांग्लादेश मूल के मुस्लिम बसने वालों की मौत हुई थी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस त्रासदी को महिलाओं और बच्चों की हत्या के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन बहुत कम रिपोर्टों में यह उल्लेख किया गया कि हिंसा के दौरान हमलावर पक्ष के कुछ स्थानीय लोग भी जवाबी कार्रवाई में मारे गए थे।

Neilli नरसंहार: PPFA ने उठाए कई अहम सवाल

संगठन ने अपने बयान में कई बुनियादी प्रश्न उठाए हैं—

  • इन हत्याओं में कौन-से हथियार इस्तेमाल किए गए थे?

  • क्या बिना आधुनिक हथियारों के स्थानीय लोग इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कुछ घंटों में मार सकते थे?

  • यदि मृतक मुस्लिम समुदाय से थे, तो उन्हें कहाँ दफनाया गया?

  • क्या नेली क्षेत्र में सामूहिक कब्रों के कोई ठोस प्रमाण मिले हैं?

‘तिवारी (Tiwary) आयोग रिपोर्ट’ को सार्वजनिक करने की मांग

PPFA का मानना है कि तिवारी (Tiwary) आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना ऐतिहासिक सच्चाई सामने लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। इससे न केवल घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट होगी, बल्कि उन राजनीतिक कथाओं और भ्रांतियों का भी अंत होगा, जिनके जरिये दशकों से असमिया समाज को दोषी ठहराने की कोशिश की जाती रही है।

‘सच्चाई सामने आए, भ्रांतियां मिटें’

संगठन का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से न सिर्फ पीड़ितों और उनके परिजनों को न्याय की दिशा में उत्तर मिल सकेंगे, बल्कि असम और असमिया समाज के प्रति फैलाई गई गलत धारणाओं का तथ्यात्मक और निष्पक्ष खंडन भी संभव होगा।

“हमारा उद्देश्य किसी समुदाय को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि इतिहास की सच्चाई को सामने लाना है,” — PPFA ने अपने बयान में कहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *