बोकारो : चर्चित साहित्यिक संस्था साहित्यलोक (Sahityalok ) की मासिक रचनागोष्ठी शनिवार की शाम वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा के चीरा चास स्थित आवास पर हुई। सेल के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी व साहित्यलोक के वरिष्ठ सदस्य हरि मोहन झा की अध्यक्षता व साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा के संचालन में आयोजित इस रचनागोष्ठी में साहित्यकारों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा, मानवीय संवेदना, देशभक्ति व सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित रचनाएं सुनाकर सभी को आनंदित किया।
रचना गोष्ठी की शुरुआत आराध्या झा एवं हिमांशु शेखर झा द्वारा प्रस्तुत शांति पाठ से हुई। तत्पश्चात नीलम झा ने हिंदी कविता ‘तुम अपनी जैसी बन जाना’ व मैथिली में बारहमासा, सतीश चंद्र झा ने मैथिली कथा ‘पाथरक आंखि’, शैलजा झा ने मैथिली कविता ‘कलमक विद्रोह’ व हिन्दी कविता ‘शून्य से संभावना’, सुनील मोहन ठाकुर ने मैथिली कविता ‘भूख’, अमन कुमार झा ने मैथिली कविता ‘झिंगुरक आंदोलन’, मैथिली कहानी ‘पाग’, विजय शंकर मल्लिक ‘सुधापति’ ने मैथिली कविता ‘झिल्लीक झरुआ’, ‘आत्मसम्मानीक झुकै ने झंडा’ व हिंदी कविता ‘गाओ स्वदेश जयगाथा’, गंगेश कुमार पाठक ने ‘जन्मदिनक शुभकामना’, मनोज उपाध्याय ‘सुमन’ ने हिंदी कविता ‘झुग्गी-झोपड़ी समस्या एवं समाधान’, अरुण पाठक ने वरिष्ठ साहित्यकार हितनाथ झा रचित व एनसीआरटी की पाठ्य-पुस्तक में शामिल मैथिली देशभक्ति गीत ‘भारत देशक प्राण तिरंगा’ की सुमधुर प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वरिष्ठ कवि बुद्धिनाथ झा ने साहित्यलोक के 34 वर्षों के सफर पर एक कविता प्रस्तुत करने के बाद अपनी मैथिली पुस्तक ‘ऊं महाभारत’ से शान्ति दूत श्रीकृष्ण व युधिष्ठिर-द्रौपदी प्रसंग सुनाकर सबकी प्रशंसा पायी। अध्यक्षीय वक्तव्य में हरि मोहन झा पठित रचनाओं पर समीक्षा टिप्पणी दी और बोकारो में साहित्यिक गतिविधियों को जीवंत बनाकर रखने में साहित्यलोक के योगदान की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि साहित्यलोक इसी तरह गतिमान रहकर साहित्य के संवर्धन में अपना योगदान आगे जारी रखेगा।
धन्यवाद ज्ञापन वरीय अधिवक्ता विश्वनाथ झा ने किया। इस अवसर पर विशेष रूप से मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी शंभु झा सहित अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

