सच्ची श्रद्धांजलि!

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, इन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने सिखाया जीवन में चाहें जैसे भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं। एपीजे अब्दुल कलाम ने अक्सर कहा करते थे अगर सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो सूरज की तरह जलना भी सीख लो ! आज उनके आदर्शों , इनके व्यवहार और इनके व्यक्तित्व के साथ चलने से, इनके दिए हुए दिशा निर्देश पर चलने से इनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी !

देश के सर्वोच्च पद पर आसीन रहे किन्तु शिक्षा में उनकी रूचि व योगदान किसी से छुपा नहीं है। राष्ट्रपति पद से रिटायरमेंट के बाद भी डॉ. कलाम ने आराम नहीं लिया बल्कि देश के कई इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों में वे विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में सक्रिय रहे। छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. कलाम स्कूलों-कॉलेजों में सेमिनार किया करते थे, उनका मानना था कि देश के विकास के लिए हमारी युवा पीढ़ी का सुशिक्षित और समृद्ध होना आवश्यक है।

पिता का पड़ा प्रभावः एपीजे अब्दुल कलाम के पिता पढ़े-लिखे नहीं थे , लेकिन उनके लगन से उनके दिए संस्कार एपीजे अब्दुल कलाम को एक महान व्यक्ति बनाया ! वह बचपन में पिता से समझ चुके थे तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को भलीभाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।

पांचवी कक्षा में ही बनाया था अपना गोलःएपीजे अब्दुल कलाम अपनी पांचवी कक्षा के दौरान ही गोल बना लिया था ! पांचवी कक्षा में पक्षी उड़ने की संबंध में जानकारी दी जा रही थी लेकिन बच्चों को समझ में नहीं आ रहा था तभी शिक्षक ने समुद्र की ओर ले गए और पक्षी उड़ते हुए दिखाएं ,इन्ही पक्षियों को देखकर कलाम ने तय कर लिया कि उनको भविष्य में विमान विज्ञान में ही जाना है। कलाम के गणित के अध्यापक सुबह ट्यूशन लेते थे इसलिए वह सुबह 4 बजे गणित की ट्यूशन पढ़ने जाते थे।

बचपन में अखबार बेचने का कार्य किया: एपीजे अब्दुल कलाम एक गरीब परिवार से आते थे और उन्होंने घर-घर जाकर बचपन में अखबार की बेचने का कार्य करते थे जिनसे उनकी आर्थिक स्थित मैं दो वक्त की रोटी प्राप्त होती थी !

आज ही का दिन हुआ था निधनः एपीजे अब्दुल कलाम आज ही के दिन वर्ष 2015 में आई आई एम शिलांग में अपना व्याख्यान ष् रहने योग्य ष्दे रहे थे तभी उनका हार्ड अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई ! उन्होंने अंतिम क्षण कहा था..मैं यह बहुत गर्वोक्ति पूर्वक तो नहीं कह सकता कि मेरा जीवन किसी के लिये आदर्श बन सकता है लेकिन जिस तरह मेरी नियति ने आकार ग्रहण किया उससे किसी ऐसे गरीब बच्चे को सांत्वना अवश्य मिलेगी जो किसी छोटी सी जगह पर सुविधाहीन सामजिक दशाओं में रह रहा हो। शायद यह ऐसे बच्चों को उनके पिछड़ेपन और निराशा की भावनाओं से विमुक्त होने में अवश्य सहायता करे।

इनकी लिखी 25 से ज्यादा पुस्तकंे आज युवाओं को प्रेरणा देती हैं। अग्नि उड़ान, इग्नाइटेड माइंडस, इंडिया- माय-ड्रीम, एनविजनिंग अन एमपावर्ड, नेशनः टेक्नालजी फार सोसायटल ट्रांसफारमेशन, विंग्स ऑफ फायर, साइंटिस्ट टू प्रेसिडेंट, माय जर्नी (मेरी जीवनयात्रा) सहित अन्य।

 

 

 

 

 

-प्रमोद कुमार जयसवाल
राष्ट्रपति से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त, रिटायर्ड प्रधानाध्यापक ।

 

 

 

 

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