अरुण पाठक
Bokaro: अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की इकाई मिथिला कला मंच (Mithila Kala Manch) द्वारा गूगल मीट (Google Meet) पर ऋतुरंग बारहमासा के संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से जुड़े कलाकारों व साहित्यकारों अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ऋतुरंग बारहमासा की अद्भुत छटा बिखेरकर सभी को आनंदित किया।
आसनसोल से जुड़ीं पूनम झा ने भगवती वंदना प्रस्तुत किया। आसनसोल की पूनम झा के संचालन व जमशेदपुर से जुड़े प्रसिद्ध साहित्यकार व शिक्षाविद् डॉ अशोक अविचल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का आरंभ भगवती वंदना से हुआ। पूनम झा ने इस भगवती वंदना के बाद राग कामोद में ‘घिरि-घिरि आयल आयल घनकारी..’ की सुमधुर प्रस्तुति दी। तत्पश्चात बनारस से जुड़े अशोक मिश्रा ने वर्तमान में प्रचंड गर्मी की तपिश को यूं बयां किया-‘भऽ रहल अछि आगिक वर्षा, सूर्यक चेन बड़ जोर यौ..’। देवघर की मीनाक्षी झा ने बारहमासा गीत की कर्णप्रिय प्रस्तुति दी। सोनीपत से विनीता ठाकुर ने ‘हम छी नारी, हमर चिनबार…’, दिल्ली से मिनाक्षी झा ने ‘सब बिसरि कोना गेलौ सजना…’, दिल्ली से ही प्रतिभा झा नेविरह गीत ‘पिया बिनु जियरा नयन बहय छै…’, भैरहवा नेपाल से सोनू ठाकुर ने मैथिली गीत ‘किऐ दुइये दिनक छुट्टी लऽ कऽ गाम ऐलिये…, जमशेदपुर से नूतन जी ने बसंत गीत ‘चैते पियार संग रंग,आइ विभोर भेलै..’, कोलकाता से
हिमाद्री मिश्रा ने ‘पावस तू ज्ञानी देश, एत बरसे नैना मोरे..’, बोकारो के अरुण पाठक ने वर्षा ऋतु पर सुंदर गीत ‘वर्षा के बुन-बुन जहर माहुर सन सखी की कहब दुख साओन मास..’, नीलम झा ने ‘जीवन आनंद सँ खिल-खिल जाय…’, जमशेदपुर से राधा कुमारी ने ‘अहीं बेटी दुलरूआ, अहीं आँखिक पुतली..’, दरभंगा से डॉ रतन कुमारी ने ‘सखि हे, पिया नहि घर अयला, बरसन लागे ना…’ सुनाकर सबकी प्रशंसा पायी। रांची से डॉ धनाकर ठाकुर, जमशेदपुर से डॉ रविन्द्र कुमार चौधरी, धनबाद से आशा मिश्रा, निशा झा, बोकारो से शंभु झा भी कार्यक्रम से जुड़े रहे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष अशोक अविचल ने अपने संबोधन में सभी प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन के माध्यम से मिथिला की संस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने 7 व 8 जून 2026 को खगड़िया के एसबी मेमोरियल स्कूल में आयोजित होने वाले 37वां अन्तरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के बारे में भी जानकारी दी। श्री अविचल ने सभी मैथिलीभाषियों से आग्रह किया कि वे जनगणना में मैथिली भाषा के प्रयोग की जानकारी अवश्य दर्ज कराएं।अंत में यात्री जी की प्रार्थना से कार्यक्रम का समापन हुआ।

