– बरखा के बुन बुन जहर माहुर सन सखी की कहब दुख साओन मास…
by Arun Pathak
Bokaro: Mithila Kala Manch (मिथिला कला मंच), अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद (Mithila Parishad) की इकाई द्वारा सावन ऋतु के आगमन के उपलक्ष्य में शुक्रवार की शाम ऑनलाइन सावन महोत्सव (sawan mahotsav) सावनक स्नेह मिथिलाक नेह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में झारखंड, बिहार, बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित नेपाल से कवि व कलाकारों ने कविता, गीत आदि प्रस्तुत कर सभी को आनंदित किया। पूरे कार्यक्रम में मैथिली लोकसंगीत, भक्ति, हास्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। भारत के विभिन्न राज्यों तथा नेपाल से जुड़े कलाकारों की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय जमशेदपुर के प्राचार्य व वरिष्ठ साहित्यकार अशोक अविचल की अध्यक्षता व कार्यक्रम संयोजक आसनसोल की पूनम झा के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना से हुई।
वाराणसी से गीतकार व गायक अशोक मिश्र ने ‘बदरा जुनि बरसे दिन रतिया..’, दिल्ली से लक्ष्मण कुमार झा ने गीत, दिल्ली से प्रतिभा झा ने ‘यौ बदरा जुनि बरसे..’, जमशेदपुर से गोपाल चन्द्र झा ने कजरी, जमशेदपुर की नूतन जी ने ‘झूला झुलबथि राधा जी…’, दरभंगा से वाचस्पति ठाकुर सुजीत ने हास्य कविता ‘सावन राति अन्हरिया..’, बोकारो से कवि व गायक तथा मिथिला कला मंच के मीडिया प्रभारी अरुण पाठक ने ‘बरखा के बुन बुन जहर माहुर सन सखी की कहब दुख साओन मास..’, धनबाद से आशा मिश्रा ने ‘जमुना किनारे कदम केर गछिया..’, दुर्गापुर से जयराम झा ने ‘आयल छी मंदिर एक आस लगा क…’, भैरवा नेपाल से सोनू ठाकुर ने ‘बदरा उमरि-झुमरि झम बरसे पिया मेरा कहिया अओथिन ना…’, नोएडा से पुष्पा पाठक ने ‘सावन लटकल रेशम झूला..’, आसनसोल से पूनम झा ने राग कामोद में ‘घिरि-घिरि आयल घनकारी..’ की सुमधुर प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सोनीपत हरियाणा से विनीता ठाकुर, अहमदाबाद से रंजू मिश्रा, धनबाद से निशा झा, घोघरडीहा से डॉ रतन कुमारी ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक अविचल ने कविता ‘मूल नक्षत्र मय जनमल नेना-तुलसीदास…’ सुनाकर सबकी प्रशंसा पायी।
अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के संस्थापक डॉ धनाकर ठाकुर ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम हैं। उपस्थित श्रोताओं ने सभी कलाकारों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को मैथिली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। अंत में एन. के. झा, संस्थापक, पटना पुस्तक मेला ने सभी कलाकारों, श्रोताओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

