Ram Mandir Donation Theft: Inside Story | जानिए राम मंदिर डोनेशन चोरी का कथित मोडस ऑपरेंडी कैसे काम करता था। एसआईटी जांच में सीसीटीवी ब्लाइंड स्पॉट, ₹500 के नोट निकालने और बैंक वाउचर में कथित हेराफेरी सहित कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए।
वकीलों ने आरोपियों का किया बहिष्कार, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार
करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा रामलला के चरणों में (Ram Mandir) श्रद्धा से चढ़ाया गया दान (Donation) कथित तौर पर एक सुनियोजित साजिश का शिकार बन गया। अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir) डोनेशन (Donation) चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती करने वाली टीम के कुछ सदस्यों ने कथित रूप से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को चकमा देकर, बैंक जमा प्रक्रिया में हेरफेर कर और नकदी के बंडलों से नोट निकालकर लंबे समय तक करोड़ों रुपये के चढ़ावे में सेंध लगाई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं थी, बल्कि मंदिर की नकदी गिनने और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया का फायदा उठाकर कथित तौर पर अंजाम दिया गया एक सुनियोजित ‘इनसाइड जॉब’ था।
साजिश की शुरुआत: कैश काउंटिंग टीम में कराई गई कथित एंट्री
पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा, जो बैंक की आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान की गिनती करने वाली टीम में तैनात था, उसने कथित तौर पर अपने साले लवकुश मिश्रा को भी उसी टीम में शामिल करा दिया।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी के बाद दोनों समेत अन्य आरोपियों को मंदिर के दान की नकदी तक सीधी पहुंच मिल गई और कथित साजिश को अंजाम देने का रास्ता खुल गया।
ऐसे दिया जाता था चोरी को अंजाम
एसआईटी (SIT) के मुताबिक, आरोपियों का कथित तरीका बेहद सुनियोजित था।
- नकदी की गिनती के दौरान मुख्य सीसीटीवी कैमरों के सामने जानबूझकर रुकावट खड़ी की जाती थी।
- कैमरे की नजर कुछ सेकंड के लिए बाधित होते ही ₹500 के नोट बंडलों से निकालकर कपड़ों में छिपा लिए जाते थे।
- इसके बाद सामान्य तरीके से गिनती जारी रखी जाती थी, जिससे किसी को तुरंत शक न हो।
- जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी तरीके को बार-बार अपनाकर बड़ी रकम कथित रूप से गायब की गई।
बैंक में जमा करने से पहले खेला जाता था दूसरा खेल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कथित साजिश केवल कैश काउंटिंग रूम तक सीमित नहीं थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, बैंक में रकम जमा करने के लिए तैयार किए जाने वाले वाउचर बनाते समय अतिरिक्त नोटों के बंडलों को रिकॉर्ड में शामिल किया जाता था। बाद में बैंक तक पहुंचने से पहले इन्हीं अतिरिक्त बंडलों को कथित रूप से निकाल लिया जाता था। इस तरह कागजों में हिसाब सही दिखाई देता था, लेकिन वास्तविक जमा राशि कम हो जाती थी।
पुलिस का मानना है कि नकदी निकालने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने की इसी दोहरी रणनीति ने कथित घोटाले को लंबे समय तक छिपाए रखा।
दान राशि में कमी से हुआ शक, गुप्त कैमरों ने खोली पोल
मई 2026 के अंतिम सप्ताह में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारियों को दान की रकम में लगातार कमी नजर आने लगी। बार-बार हो रही इस कमी के बाद ट्रस्ट ने मौजूदा सीसीटीवी के अलावा गुप्त कैमरे भी लगवाए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन्हीं गुप्त कैमरों में कैद हुई संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर ट्रस्ट सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई और एसआईटी जांच शुरू हुई। इसके बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
₹14,500 की तनख्वाह, लेकिन आलीशान संपत्तियां जांच के घेरे में
जांच के दौरान मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा की कथित संपत्तियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।
पुलिस के अनुसार, लगभग ₹14,500 प्रतिमाह वेतन पाने वाले अनुकल्प के पास कथित तौर पर—
- अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में ₹40 से ₹65 लाख मूल्य का मकान,
- मिल्कीपुर के बसावा गांव में नया फार्महाउस,
- तथा नई महिंद्रा स्कॉर्पियो खरीदने की तैयारी जैसी जानकारियां सामने आई हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या ये संपत्तियां उसकी वैध आय के अनुरूप हैं या इनका संबंध कथित रूप से गबन की गई दान राशि से है। हालांकि, अनुकल्प के परिवार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
छापों में नकदी, जेवर और दस्तावेज बरामद
मामले की जांच तेज होने के बाद पुलिस ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर छापेमारी की।
जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न ठिकानों से लाखों रुपये नकद, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और संभावित बेनामी संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि कथित धन के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच में गहराया साजिश का शक
एसआईटी का मानना है कि यह कथित गबन किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि कई लोगों की मिलीभगत से रची गई एक सुनियोजित साजिश हो सकती है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस पूरे मामले में और भी लोग शामिल थे या किसी अन्य व्यक्ति को भी कथित रूप से दान की रकम का लाभ मिला।
आरोपियों का बहिष्कार, सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत समाप्त होने पर उन्हें अदालत में पेश किया गया। इस बीच अयोध्या-फैजाबाद बार एसोसिएशन के कई अधिवक्ताओं ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला लिया है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इसी विषय से जुड़ी जनहित याचिका पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित है।
फिलहाल एसआईटी और अयोध्या पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कितनी राशि का गबन हुआ, धन कहां-कहां गया और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

