Mumbai: जिस उम्र में अधिकांश युवा कॉलेज की पढ़ाई और करियर की तैयारी में जुटे रहते हैं, उसी उम्र में मुंबई के 19 वर्षीय उद्यमी Dhravya Shah (ध्रव्य शाह) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनके स्टार्टअप Supermemory ने सीड फंडिंग में करीब 30 लाख डॉलर (लगभग 26 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। यह स्टार्टअप AI की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक—लंबे समय तक जानकारी याद रखने (Long-term Memory)—का समाधान विकसित कर रहा है।
इस निवेश के साथ Dhravya भारत के सबसे कम उम्र के सफल AI स्टार्टअप संस्थापकों में शामिल हो गए हैं। उन्हें सिलिकॉन वैली के बड़े निवेशकों और दुनिया की प्रमुख टेक हस्तियों का समर्थन मिला है।
हैकाथॉन के आइडिया से बनी करोड़ों की कंपनी
Supermemory की शुरुआत वर्ष 2024 में एक हैकाथॉन प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। शुरुआत में यह एक “सेकेंड ब्रेन” ऐप था, जो लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, नोट्स और दस्तावेज़ व्यवस्थित रखने में मदद करता था।
ओपन-सोर्स समुदाय में यह प्रोजेक्ट तेजी से लोकप्रिय हुआ और कुछ ही समय में GitHub पर इसे 10,000 से अधिक स्टार मिल गए। इसके बाद कई AI स्टार्टअप्स ने अपने उत्पादों में लॉन्ग-टर्म मेमोरी जोड़ने के लिए इस तकनीक में रुचि दिखाई।
Dhravya ने जल्द ही समझ लिया कि असली अवसर आम उपभोक्ताओं के बजाय AI डेवलपर्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में है। इसके बाद Supermemory को एक AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया।
AI को ‘याददाश्त’ देने का दावा
Supermemory ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे AI हर बार नई शुरुआत करने के बजाय पिछली बातचीत और जानकारी को याद रख सके।
यह प्लेटफॉर्म ईमेल, चैट, डॉक्यूमेंट, पीडीएफ और अन्य फाइलों जैसी असंगठित (Unstructured) जानकारी को व्यवस्थित Knowledge Graph में बदल देता है। इससे AI एप्लिकेशन जरूरत पड़ने पर पुरानी जानकारी तुरंत हासिल कर लेते हैं और अधिक सटीक तथा व्यक्तिगत जवाब दे पाते हैं।
कंपनी के अनुसार, Cluely, Montra और Scira जैसे AI स्टार्टअप इसकी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
सिलिकॉन वैली के दिग्गजों का मिला भरोसा
Supermemory ने वर्ष 2025 के अंत में अपना सीड फंडिंग राउंड पूरा किया। TechCrunch के अनुसार कंपनी ने 2.6 मिलियन डॉलर, जबकि कई भारतीय मीडिया रिपोर्टों में इसे लगभग 3 मिलियन डॉलर बताया गया है।
इस निवेश दौर का नेतृत्व Susa Ventures, Browder Capital और SF1.vc ने किया। वहीं निवेशकों में Google AI के प्रमुख Jeff Dean, Cloudflare के CTO Dane Knecht, DeepMind के Logan Kilpatrick और Sentry के संस्थापक David Cramer जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
Dhravya Shah sold two companies before he could legally drink, then raised $3 million alone at 19.
This 73-minute interview is the clearest case I’ve heard for why AI memory is the next platform.
Here’s the part I can’t stop thinking about:
> everyone will have their own AI… https://t.co/6GxYtycl60 pic.twitter.com/Xqh0rueOWa
— Phosphen (@phosphenq) June 26, 2026
16 साल में बेची पहली कंपनी, IIT का रास्ता छोड़ा
Dhravya की उद्यमिता की शुरुआत बेहद कम उम्र में हो गई थी। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में अपना पहला स्टार्टअप बेच दिया था।
Supermemory शुरू करने से पहले वह अपने कॉलेज हॉस्टल से ही 15 से अधिक ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट तैयार कर चुके थे। उन्होंने इन परियोजनाओं को व्यावसायिक बनाने के बजाय डेवलपर समुदाय के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया, जिससे AI डेवलपर्स के बीच उनकी मजबूत पहचान बनी।
Dhravya ने पारंपरिक करियर चुनने के बजाय IIT की तैयारी छोड़कर स्टार्टअप बनाने का फैसला किया और यही निर्णय आज उनकी सबसे बड़ी सफलता का आधार बन गया।
अमेरिका का प्रतिष्ठित O-1 वीजा भी मिला
AI और तकनीक के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए ध्रव्य शाह को अमेरिका का प्रतिष्ठित O-1 वीजा भी मिला है। यह वीजा उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने विज्ञान, तकनीक, कला या व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हों।
AI की बड़ी समस्या का समाधान बनने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि AI चैटबॉट्स और डिजिटल असिस्टेंट्स की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वे लंबे समय तक बातचीत का संदर्भ (Context) याद नहीं रख पाते।
Supermemory इसी समस्या का समाधान विकसित कर रहा है। कंपनी का उद्देश्य AI के लिए एक ऐसी ‘मेमोरी लेयर’ तैयार करना है, जिससे AI एप्लिकेशन पहले की बातचीत और जानकारी को सुरक्षित रख सकें और समय के साथ अधिक समझदार, सटीक और व्यक्तिगत अनुभव दे सकें।
ताजा फंडिंग और वैश्विक टेक दिग्गजों के समर्थन के बाद Supermemory अब खुद को अगली पीढ़ी के AI इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

