मंगलमूर्ति गणेश पर Mithila Kala Manch के ऑनलाइन संगीत समारोह में बही भक्ति रस की धार

मंगलमूर्ति गणेश पर Mithila Kala Manch के ऑनलाइन संगीत समारोह में बही भक्ति रस की धार
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अरुण पाठक

Bokaro : अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद की इकाई मिथिला कला मंच द्वारा गुरुवार की शाम मंगलमूर्ति गणेश विषय पर एक भव्य ऑनलाइन संगीत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कलाकारों ने भक्ति गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों से सभी को आनंदित कर दिया।

गीतकार व गायक वाराणसी के अशोक कुमार मिश्र की अध्यक्षता व मिथिला कला मंच की संयोजक व गायिका आसनसोल की पूनम झा के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत पूनम झा द्वारा प्रस्तुत भगवती वंदना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि…’ व गणेश वंदना की सुमधुर प्रस्तुति से हुई। दिल्ली की प्रतिभा झा ने ‘सखी मूरति सुहावन…’, अहमदाबाद की रेणु मिश्र ने ‘हमरो लेल खोलियौ…’ के बाद ‘हे गणपति बप्पा’ प्रस्तुत की। मिथिला कला मंच के मीडिया प्रभारी बोकारो के कवि व गायक अरुण पाठक ने ‘गाइए गणपति जगवंदन…’ की सुमधुर प्रस्तुति से सबकी वाहवाही ली। जमशेदपुर की पूनम झा ने गौरी माता की नवाहरी ‘लूप-लूप काज करू हे गौरी’, रंजू मिश्रा ने गणेश वंदना, जयपुर की रेणु झा व वाराणसी के अशोक मिश्र ने गणेश वंदना सुनाकर भक्ति रस की धारा प्रवाहित कर दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर ने कहा कि मिथिला में गणेश चतुर्थी के दिन मुख्य रूप से चौरचन पर्व मनाने की परंपरा है। लेकिन गणेशजी की पूजा सर्वप्रथम की जाती है। उन्होंने कहा कि कल हरिवासर व्रत सम्पन्न हुई है, जो 1900 से 2100 ई. के बीच मात्र 31 बार पड़ने वाला विशेष योग है और इस योग में लगभग 60 घंटे का व्रत रहता है।

डॉ. अशोक अविचल, प्राचार्य, लालबहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज, जमशेदपुर ने कहा कि इस तरह की संगीत-संध्या लोगों के पारस्परिक सम्बन्ध को मजबूत करते हैं और मानसिक शान्ति प्रदान करते हैं। पटना पुस्तक मेला के संस्थापक एन. के. झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से जुड़े मैथिली कला व संगीत प्रेमियों की सहभागिता रही।

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