एक ही कक्षा में साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के विद्यार्थी! बोकारो के सरकारी प्लस-टू स्कूलों में शिक्षकों की कमी ने पढ़ाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यार्थियों का आरोप है कि विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण अलग-अलग संकाय के छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बोकारो स्टील सिटी के सेक्टर-2ए स्थित राजकीयकृत प्लस-टू उच्च विद्यालय, लकड़ाखंदा के कुछ छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि साइंस और आर्ट्स की अलग-अलग कक्षाएं नियमित रूप से नहीं चल रही हैं। कभी-कभार कॉमर्स के विद्यार्थियों के साथ भी उन्हें एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
विद्यार्थियों के मुताबिक, सबसे अधिक परेशानी साइंस की पढ़ाई में हो रही है। भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की जरूरत होती है, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण इन विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि प्लस-टू के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में दाखिले की तैयारी करनी होती है। ऐसे में विषयवार नियमित पढ़ाई नहीं होने का सीधा असर उनकी तैयारी और परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे
सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। इनमें कई ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके लिए निजी कोचिंग या महंगी ट्यूशन लेना संभव नहीं है। ऐसे में स्कूल में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इस संबंध में पूछे जाने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) प्रवीण रंजन ने कहा कि यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने मामले की जांच कराने और आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
उन्होंने कहा, “अगर ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष ने उपायुक्त से मांगा हस्तक्षेप
विद्यार्थियों से मिली जानकारी के बाद बोकारो जिला कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष राज कुमार विद्यार्थी प्लस-टू उच्च विद्यालय, लकड़ाखंदा पहुंचे और कक्षा 11 के विद्यार्थियों से मिले। उनका कहना है कि इस दौरान उन्होंने विज्ञान और कला संकाय के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में पढ़ते देखा।
मामले को गंभीर बताते हुए राज कुमार विद्यार्थी ने बोकारो के उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने जिला प्रशासन से सरकारी प्लस-टू स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता की जांच कराने, विषयवार रिक्तियों का आकलन करने तथा जरूरत के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति अथवा तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की है।
राज कुमार विद्यार्थी ने कहा कि साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग और नियमित कक्षाएं चलनी चाहिए। शिक्षकों की कमी का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
उन्होंने कहा, “शिक्षकों की कमी बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।”
सवाल छात्रों के भविष्य का
शिक्षकों की कथित कमी ने बोकारो के सरकारी प्लस-टू स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। प्लस-टू की पढ़ाई छात्रों के शैक्षणिक जीवन का वह अहम पड़ाव है, जहां विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की जरूरत सबसे अधिक होती है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब विज्ञान, कला और वाणिज्य के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में बैठना पड़े, तो विषयवार गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कैसे सुनिश्चित होगी?
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर हैं कि मामले की जांच के बाद छात्रों की समस्या दूर करने और नियमित विषयवार पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

