– दिल एक मंदिर है, प्यार की जिसमें होती है पूजा में प्रीतम का घर है….
Bokaro: हाल ही में दिवंगत हुईं फिल्म संगीत की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) व इसके पूर्व अप्रैल में दिवंगत हुईं प्रख्यात पार्श्वगायिका आशा भोसले (Asha Bhosle) की याद में बुधवार की देर शाम सेक्टर 12 में संगीत संध्या आयोजित कर बोकारो के कलाकारों ने उन्हें स्वरमयी श्रद्धांजलि दी। स्वरागिनी म्युजिकल ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित इस संगीत संध्या की शुरुआत गायक अरुण पाठक, रमण चौधरी, पूर्णेन्दु कुमार सिंह, गायिका रंजू सिंह व श्वेता प्रियदर्शिनी द्वारा आशा भोसले व सुमन कल्याणपुर की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पार्चन से हुई।
कलाकारों ने कहा कि संगीत के प्रति समर्पण, उत्कृष्ट गायन कौशल व सुमधुर आवाज की बदौलत इन दोनों पार्श्वगायिकाओं ने फिल्म संगीत को एक नया आयाम दिया। फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के बाद जिन गायिकाओं ने फिल्म संगीत में उल्लेखनीय योगदान दिया उनमें आशा भोसले व सुमन कल्याणपुर प्रमुख नाम हैं। जब भी सुरीले और यादगार गीतों की बात होती है तो लता जी के साथ ही इन दोनों गायिकाओं का नाम भी आदर के साथ लिया जाता है। अपने स्वर माधुर्य के लिए ये सदैव स्मरणीय रहेंगी।
इस अवसर पर कलाकारों ने इनके गाए कुछ यादगार गीतों की प्रस्तुति से इन्हें स्वरमयी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत गायिका रंजू सिंह ने भक्ति गीत ‘तोरा मन दर्पण कहलाए…’ सुनाकर की। प्रसिद्ध गायक अरुण पाठक ने ‘दिल एक मंदिर है..’, ‘इतना है तुमसे प्यार मुझे मेरे राजदार…’ व गायिका रंजू सिंह के साथ ‘मेरा प्यार भी तू है ये बहार भी तू है..’ एवं ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को नजर नहीं चुराना सनम..’ की सुमधुर प्रस्तुति से समां बांध दिया। रमण चौधरी ने ‘ठहरिए होश में आ लूं तो चले जाइएगा..’, ‘अगर तेरी जलवा नुमाई ना होती… व रंजू सिंह के साथ तुमने पुकारा और हम चले आए..’ की प्रस्तुति से स्वरमयी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम रमण चौधरी व रागिनी सिन्हा अंबष्ट के संयोजन में हुआ।

