Divyastra Mk-1 Drone का सफल परीक्षण: 500 किमी रेंज, AI और स्वार्म टेक्नोलॉजी से लैस

Divyastra Mk-1 Drone का सफल परीक्षण: 500 किमी रेंज, AI और स्वार्म टेक्नोलॉजी से लैस
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News Desk: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित एआई-संचालित (AI-Powered) लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन ‘दिव्यास्त्र मार्क-1’ (Divyastra Mk-1) का सफल परीक्षण किया गया है। इस सफलता को देश की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और आधुनिक युद्ध तकनीकों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिव्यास्त्र मार्क-1 को लखनऊ स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी होवरआईटी (HoverIT) द्वारा विकसित किया गया है। यह ड्रोन सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाना और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना है। भारतीय रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित यह ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले करने में सक्षम है, जिससे सेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

सेना के सामने किया गया सफल प्रदर्शन

हाल ही में इस ड्रोन का प्रदर्शन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष किया गया, जहां इसने अपनी विभिन्न क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने स्वायत्त रूप से उड़ान भरने, लक्ष्य की पहचान करने और मिशन को पूरा करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण भारत के बढ़ते ड्रोन इकोसिस्टम और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम

दिव्यास्त्र मार्क-1 को लंबी दूरी की कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन कई घंटों तक हवा में रह सकता है और लगभग 500 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

इसकी लंबी उड़ान क्षमता इसे सीमा निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर सटीक हमले करने के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली है। यह जटिल परिस्थितियों में भी खुद दिशा तय कर सकता है, संभावित लक्ष्यों की पहचान कर सकता है और बेहद कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ मिशन पूरा कर सकता है।

दिव्यास्त्र मार्क-1 में स्वार्म (Swarm) तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसके तहत कई ड्रोन एक साथ मिलकर मिशन को अंजाम दे सकते हैं। आधुनिक युद्ध में ऐसी तकनीक को गेम-चेंजर माना जा रहा है।

आयात पर निर्भरता होगी कम

भारत लंबे समय से उन्नत ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहा है। दिव्यास्त्र मार्क-1 के सफल परीक्षण से इस निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी प्रणाली होने के कारण यह न केवल लागत को कम करेगी बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी भारत को अधिक आत्मनिर्भर बनाएगी।

दिव्यास्त्र मार्क-2 पर भी काम जारी

दिव्यास्त्र परियोजना का अगला चरण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, दिव्यास्त्र मार्क-2 पर काम जारी है, जिसमें अधिक दूरी तक मार करने की क्षमता, ज्यादा पेलोड और उन्नत एआई फीचर्स शामिल किए जाएंगे।

यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भारत के पास भविष्य में एक अत्याधुनिक स्वदेशी ड्रोन स्ट्राइक सिस्टम होगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा।

आधुनिक युद्ध में भारत की बढ़ती ताकत

दिव्यास्त्र मार्क-1 का सफल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में युद्ध के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं और ड्रोन आधुनिक सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

इस उपलब्धि के साथ भारत ने यह संकेत दिया है कि वह न केवल आधुनिक रक्षा तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार है, बल्कि उन्हें स्वदेशी स्तर पर विकसित करने की क्षमता भी रखता है। दिव्यास्त्र मार्क-1 की सफलता भारत को आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और उन्नत सैन्य तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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