US, Iran युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती: ईरान का 440.9 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium)

US, Iran युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती: ईरान का 440.9 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium)
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by Ashis Sinha
The US-Iran peace deal may have ended the war, but the fate of Iran’s 440-kg enriched uranium stockpile remains unresolved. Here’s why the nuclear issue could shape the future of the agreement. (
युद्ध खत्म हो गया, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। ईरान के 440.9 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम भंडार पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें। जानिए शांति समझौते के बाद आगे क्या होगा।)

 

 

अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच शांति समझौते की घोषणा ने मध्य पूर्व में युद्ध की आशंकाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। इस समझौते के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी आई है और तेल की कीमतों में भी नरमी देखी गई है। लेकिन युद्ध समाप्त होने के बावजूद एक बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—ईरान के समृद्ध (Enriched) यूरेनियम का क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह मुद्दा है जो तय करेगा कि वर्तमान युद्धविराम स्थायी शांति में बदलेगा या नहीं।

आखिर मामला क्या है?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास लगभग 440.9 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। यह स्तर सामान्य परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक स्तर से कहीं अधिक है और तकनीकी रूप से हथियार-ग्रेड (90 प्रतिशत) यूरेनियम तक पहुंचने के लिए केवल एक छोटा कदम दूर माना जाता है।

यही वजह है कि अमेरिका, यूरोपीय देशों और इज़राइल की चिंता का केंद्र ईरान का यह यूरेनियम भंडार बना हुआ है।

शांति समझौते में क्या तय हुआ?

अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते में युद्ध समाप्त करने, तनाव कम करने और आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने फिलहाल आगे यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) रोकने और परमाणु कार्यक्रम के विस्तार को सीमित करने का आश्वासन दिया है।

हालांकि, मौजूदा समृद्ध यूरेनियम भंडार का क्या होगा, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस मुद्दे को भविष्य की वार्ताओं के लिए छोड़ दिया गया है।

अमेरिका क्या चाहता है?

वाशिंगटन लंबे समय से मांग करता रहा है कि ईरान अपने उच्च-स्तरीय समृद्ध यूरेनियम को या तो देश से बाहर भेजे, नष्ट करे या फिर उसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखे।

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि यदि यह यूरेनियम ईरान के नियंत्रण में बना रहता है, तो भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने की आशंका बनी रहेगी।

ईरान का रुख क्या है?

तेहरान ने साफ किया है कि वह अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने के लिए सहमत नहीं हुआ है।

ईरानी नेताओं का कहना है कि परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग उनका अधिकार है और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसी भी समझौते के तहत पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी समूह भी यूरेनियम भंडार को बाहर भेजने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।

क्या कोई बीच का रास्ता निकल सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे व्यावहारिक समाधान यह हो सकता है कि ईरान 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम को कम स्तर तक पतला (Dilute) कर दे, ताकि उसका उपयोग केवल नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में हो सके।

ऐसी स्थिति में यूरेनियम ईरान में ही रहेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण और निगरानी के तहत। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंताएं भी कम हो सकती हैं और ईरान अपनी परमाणु संप्रभुता बनाए रखने का दावा भी कर सकेगा।

असली परीक्षा अभी बाकी है

अमेरिका-ईरान युद्ध भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन परमाणु विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।

शांति समझौते ने फिलहाल हथियारों की आवाज को शांत कर दिया है, लेकिन ईरान के 440.9 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम का भविष्य अभी भी अनिश्चित है। यही मुद्दा आने वाले महीनों में अमेरिका-ईरान संबंधों और पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता का सबसे बड़ा निर्णायक साबित हो सकता है।

युद्ध खत्म हो गया है, लेकिन परमाणु कूटनीति की असली लड़ाई अभी बाकी है।

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