Mithila Sanskritik Parishad, Bokaro ने मनाई Manipadma Jayanti; आयोजित हुआ मैथिली कवि सम्मेलन
बोकारो : बोकारो में मैथिली भाषा-भाषियों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद् की ओर से साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध मैथिली साहित्यकार डॉ. ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ की स्मृति में जयंती समारोह सह मैथिली कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन रविवार की शाम सेक्टर-4 ई स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल परिसर के विद्यापति सभागार में किया गया।
समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, मिथिला सांस्कृतिक परिषद् के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष गणेश चंद्र झा, परिषद् के निदेशक मंडल सदस्य कृष्ण चंद्र झा, वर्तमान महासचिव नीरज चौधरी, उपाध्यक्ष श्रवण कुमार झा, सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के उपाध्यक्ष बटोही कुमार, संयुक्त सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक सुनील मोहन ठाकुर तथा मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष पूनम मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मणिपद्म की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन भी किया गया।
अपने स्वागत भाषण में परिषद् के महासचिव नीरज चौधरी ने मैथिली साहित्य को समृद्ध बनाने में मणिपद्म के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिथिला सांस्कृतिक परिषद् वर्ष 1990 से लगातार मणिपद्म जयंती के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा को परिषद् की ओर से ‘मिथिला गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कवि डॉ. रणजीत कुमार झा ने बुद्धिनाथ झा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैथिली महाकाव्य ऊँ महाभारत के रचयिता बुद्धिनाथ झा साहित्य की लगभग हर विधा में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। वे एक कुशल रंगकर्मी और राष्ट्रीय स्तर के मंच संचालक के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
समारोह में कवयित्री कल्पना झा के काव्य-संग्रह ‘हसरतों के बीच’ का विमोचन भी किया गया। साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा ने पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कविता-संग्रह में कवयित्री ने विभिन्न रसों की कविताओं के माध्यम से अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया है।
मुख्य वक्ता बुद्धिनाथ झा ने मणिपद्म के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मणिपद्म बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और अद्भुत प्रतिभा वाले साहित्यकार थे। लोकगाथाओं पर आधारित उनके कई उपन्यास काफी चर्चित हुए। साहित्य की अन्य विधाओं में भी उनकी रचनाओं को सराहना मिली। उनकी रचनाएं सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत थीं। वर्ष 1973 में उनके उपन्यास नैका बनिजारा के लिए उन्हें प्रतिष्ठित साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दूसरे सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा की अध्यक्षता में मैथिली कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें कवि-कवयित्रियों ने मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत विभिन्न रसों की कविताएं एवं गीत प्रस्तुत कर देर शाम तक श्रोताओं को आनंदित किया।
कवयित्री कल्पना झा ने ‘जो रे चांद तू कहिहें सजन सं हमर…’ और ‘माय गे तू बकलोल नहि छैं…’, कवि धनंजय कुमार दास ने मैथिली गुदगुदी, डॉ. रणजीत कुमार झा ने ‘समधि समधिन थारी में…’, गंगेश कुमार पाठक ने ‘ई जुनि बुझि मुन्ना झूठ बजै छी…’, अरुण पाठक ने सद्भावना गीत ‘जाति धर्म के नाम पर नहि बांटू इंसान के…’, पूनम चौधरी ने ‘की बखान करू अपन मिथिला के…’, भुटकुन झा ने संवेदना एवं श्रद्धांजलि की प्रस्तुति दी।
सुनील मोहन ठाकुर ने ‘हम ठाढ़े रही, ओ चलि गेली…’ सुनाया। वरिष्ठ साहित्यकार विजय शंकर मल्लिक ने अपनी मैथिली कविता ‘ओ मणिपद्म कहां आब पाबी, जिनकर गुण अद्यहुं सभ गाबी…’ के माध्यम से मणिपद्म को याद किया। वहीं बुद्धिनाथ झा ने ‘कालजयी रचतै के…’ कविता प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा बटोरी।
मंच संचालन सुनील मोहन ठाकुर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परिषद् के उपाध्यक्ष श्रवण कुमार झा ने किया।
कार्यक्रम में श्रीमोहन झा, विजय कुमार झा, मिहिर कुमार झा ‘राजू’, अविनाश झा ‘अवि’, शंभु झा, सुदीप कुमार ठाकुर, गोविंद कुमार झा, विजय कुमार मिश्र ‘अंजु’, विश्वनाथ झा, दुर्गानंद झा, गणेश झा, अशोक झा, मनोज झा, अरविंद कुमार मिश्र, शिवशंकर झा, बिनोद झा, विश्वनाथ गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

