Rahul Gandhi की “Vote Chori” याचिका में 14 खामियां (defects), SC रजिस्ट्री ने ₹220 की फीस कमी पर उठाए सवाल

Rahul Gandhi की "Vote Chori" याचिका में 14 खामियां (defects), SC रजिस्ट्री ने ₹220 की फीस कमी पर उठाए सवाल
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‘Vote Chori’ Case: SC Registry Seeks ₹220 Fee, Flags Missing Documents

 

New Delhi: चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की कानूनी लड़ाई में फिलहाल प्रक्रियागत अड़चन आ गई है। सुप्रीम कोर्ट (SC) की रजिस्ट्री ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका में 14 खामियां बताई हैं। इनमें निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, जरूरी दस्तावेजों का अधूरा होना और कुछ कानूनी प्राधिकरण पत्रों का गायब या हस्ताक्षर रहित होना शामिल है।

यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। इसे डायरी नंबर 64196/2026 के तहत दर्ज किया गया है। रजिस्ट्री की आपत्तियों को दूर किए जाने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हालांकि, ये आपत्तियां फिलहाल प्रक्रियागत कमियों से जुड़ी हैं। इनका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज कर दिया है या उन पर कोई फैसला सुनाया है।

क्या हैं रजिस्ट्री की आपत्तियां?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका के साथ दाखिल दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं में कई कमियां पाई हैं। इनमें नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे का गायब होना या उन पर हस्ताक्षर नहीं होना शामिल है। वकालतनामा वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपने वकील को अदालत में अपनी ओर से पैरवी करने का अधिकार देता है।

इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति मांगी गई है। याचिका के साथ कुछ जरूरी न्यायिक आदेशों और सहायक दस्तावेजों की प्रतियां भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

रजिस्ट्री ने कुछ दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध नहीं होने, पन्नों के अस्पष्ट या अधूरे होने, छोटे अक्षरों में सामग्री होने और रंगीन प्रतियां जमा करने से जुड़ी आपत्तियां भी उठाई हैं। याचिका में चुनाव आयुक्तों को निजी प्रतिवादी बनाए जाने के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगे जाने की खबर है।

इन सभी आपत्तियों के बीच निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी भी दर्ज की गई है। याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम को इन कमियों को दूर कर आवश्यक दस्तावेज और फीस जमा करनी होगी।

याचिका में क्या मांग की गई है?

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं को आशंका है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।

याचिका में मांग की गई है कि मतदाता सूची में नामों को हटाने और उनमें किए गए बदलावों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि मामले की सुनवाई होने तक SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार किया जाए। साथ ही, किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सूचना देने और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

इसके अलावा, याचिका में बूथवार उन मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है, जिनके नाम हटाए गए हैं। इसमें नाम हटाने के कारणों और संबंधित निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है।

विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है।

पंजाब में मतदाताओं के नाम घटने का मामला भी उठाया

याचिका में पंजाब की मतदाता सूची में हुए बदलावों का भी उल्लेख किए जाने की खबर है। इसके अनुसार, 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में जून 2026 के लगभग 2.14 करोड़ मतदाताओं के मुकाबले करीब 20.66 लाख नाम कम होने का दावा किया गया है।

विपक्ष ने इस बदलाव के पैमाने और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, केवल नामों की संख्या कम होने से यह साबित नहीं होता कि हटाए गए सभी मतदाता पात्र थे या उनके नाम गैरकानूनी तरीके से हटाए गए।

इस मुद्दे पर वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित रिकॉर्ड, नाम हटाने के कारणों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही किया जा सकता है।

INDIA गठबंधन ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल

यह याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है, जब INDIA गठबंधन के नेता निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेता मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात की मांग को लेकर भी विपक्षी नेताओं की कोशिश चर्चा में रही। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक मर्यादा और शक्तियों के पृथक्करण का हवाला देते हुए मुलाकात से इनकार किया था। साथ ही, यह संकेत दिया गया था कि विधिवत दायर याचिका पर कानून के अनुसार विचार किया जा सकता है।

आगे क्या होगा?

अब याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से बताई गई 14 खामियों को दूर करना होगा। इसमें 220 रुपये की कोर्ट फीस की कमी पूरी करने के साथ-साथ जरूरी दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं को ठीक करना भी शामिल है।

आपत्तियां दूर होने के बाद याचिका को सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि मतदाता सूची में संशोधन को लेकर उठाए गए सवालों और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग पर न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं।

फिलहाल, रजिस्ट्री की आपत्तियों को याचिका खारिज किए जाने या राहुल गांधी के आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं माना जा सकता। मामले का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि याचिकाकर्ता कमियों को कब तक दूर करते हैं और याचिका सुनवाई के लिए कब सूचीबद्ध होती है।

Ashis Sinha

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