क्षणिक स्वार्थ से नागरिक बोध तक: एक आवश्यक वैचारिक बदलाव की आवश्यकता

क्षणिक स्वार्थ से नागरिक बोध तक: एक आवश्यक वैचारिक बदलाव की आवश्यकता

क्या कारण है कि सही और गलत का ज्ञान होने के बावजूद लोग नियम तोड़ते हैं? प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश का यह विचारोत्तेजक लेख नागरिक बोध, नैतिक शिक्षा, पर्यावरण, कानून और सामाजिक जिम्मेदारी पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

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धधकता भविष्य: पर्यावरणीय संकट का नया चेहरा

धरती का तापमान जिस तेज़ी से बढ़ रहा है, वह अब केवल वैज्ञानिक चेतावनियों या शोधपत्रों तक सीमित नहीं रह गया है — यह मानव सभ्यता के अस्तित्व पर एक …

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