News Desk: India और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान हुआ, जहां उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और ऊर्जा संबंधों के बीच यह डील खास महत्व रखती है।
ADNOC पहले से ही कर्नाटक के मंगलुरु स्थित भारत के रणनीतिक तेल भंडार में कच्चा तेल स्टोर करती रही है। नए समझौते के बाद कंपनी भारत में अपनी भंडारण क्षमता को और बढ़ा सकती है। माना जा रहा है कि विशाखापत्तनम और ओडिशा के चांदीखोल में प्रस्तावित भंडारण परियोजनाओं में भी यूएई की भागीदारी हो सकती है।
A major milestone for India’s energy security 🇮🇳🤝🇦🇪
Following PM Shri @narendramodi Ji’s visit, the UAE will store up to 30 million barrels in India’s Strategic Petroleum Reserve.
✔ UAE bears the storage cost
✔ India gets priority access during emergenciesA strategic… pic.twitter.com/UEVCjoeF5D
— Harsh Sanghavi (@sanghaviharsh) May 15, 2026
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और यूएई ने एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और भंडारण परियोजनाओं पर भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है। इसके अलावा फुजैरा में संभावित तेल भंडारण सहयोग पर भी बातचीत हुई है।
फिलहाल भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर में मौजूद हैं। अबू धाबी के साथ यह नया समझौता भविष्य में किसी वैश्विक ऊर्जा संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में भारत को बड़ी राहत दे सकता है।
भारत और यूएई के बीच संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देश अब सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।


