DRDO की नई ढाल: भारत की Ballistic Missile Defence (BMD) प्रणाली क्या है? 5,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलों (Missiles) को कैसे रोक सकती है

DRDO की नई ढाल: भारत की Ballistic Missile Defence (BMD) प्रणाली क्या है? 5,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलों (Missiles) को कैसे रोक सकती है
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by Ashis Sinha

क्या है भारत (India)का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (Ballistic Missile Defence- BMD) सिस्टम? जानिए DRDO की नई मिसाइल ढाल (Missile Shield) कैसे 5,000 किमी तक मार करने वाली दुश्मन मिसाइलों को हवा या अंतरिक्ष में ही नष्ट कर सकती है।

भारत (India) ने अपनी सामरिक सुरक्षा क्षमता में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा जून 2026 में किए गए सफल परीक्षणों के बाद देश की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (Ballistic Missile Defence- BMD) प्रणाली अब लंबी दूरी की दुश्मन मिसाइलों को हवा या अंतरिक्ष में ही नष्ट करने में सक्षम हो गई है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है।

10 और 11 जून को किए गए तीन लगातार उड़ान परीक्षणों ने साबित कर दिया कि भारत की बहु-स्तरीय (Multi-Layered) मिसाइल रक्षा प्रणाली अब 2,000 से 5,000 किलोमीटर तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकती है।

क्या है बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम?

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना होता है।

यह प्रणाली अत्याधुनिक रडार, सेंसर, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर मिसाइलों के संयोजन से काम करती है। जैसे ही कोई दुश्मन मिसाइल लॉन्च होती है, यह प्रणाली उसकी दिशा, गति और संभावित लक्ष्य का पता लगाकर उसे रास्ते में ही मार गिराने के लिए इंटरसेप्टर मिसाइल दागती है।

कैसे काम करती है भारत की नई मिसाइल ढाल? (How India’s Multi-Layered Missile Shield Works)

भारत की BMD प्रणाली दो स्तरों पर काम करती है।

पहला, एक्सो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्शन, जिसमें दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर अंतरिक्ष में नष्ट किया जाता है।

दूसरा, एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्शन, जिसमें मिसाइल को वायुमंडल के भीतर ही मार गिराया जाता है।

DRDO की नई ढाल: भारत की Ballistic Missile Defence (BMD) प्रणाली क्या है? 5,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलों (Missiles) को कैसे रोक सकती है

यह दोहरी सुरक्षा परत भारत को आने वाली मिसाइलों को कई चरणों में रोकने की क्षमता देती है, जिससे हमले को विफल करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

5,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलों के लिए बड़ी चुनौती

हालिया परीक्षणों में DRDO ने ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया जो 2,000 से 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलों को रोक सकती है। इन्हें इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) कहा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता भारत की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देती है और देश के प्रमुख शहरों, सैन्य ठिकानों तथा रणनीतिक परिसंपत्तियों की रक्षा सुनिश्चित करती है।

ICBM क्या होती है?

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिनी जाती है। इसकी मारक क्षमता सामान्यतः 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है और यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होती है।

ICBM पहले रॉकेट की तरह अंतरिक्ष में जाती है और फिर अत्यधिक गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर अपने लक्ष्य पर हमला करती है। इसकी तेज गति और ऊंचाई के कारण इसे रोकना बेहद कठिन माना जाता है।

हालिया परीक्षणों के बाद भारत ने ऐसी तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया है जो ICBM श्रेणी के खतरों से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं।

DRDO के सफल परीक्षणों ने बढ़ाया भरोसा

10 और 11 जून को DRDO ने लगातार तीन उड़ान परीक्षणों में अपने इंटरसेप्टर मिसाइलों की क्षमता का प्रदर्शन किया। इन मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक ट्रैक कर उन्हें नष्ट किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन सफल परीक्षणों को भारत की रक्षा तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

समुद्री सुरक्षा को भी मिली नई ताकत

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली के अलावा DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना को समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने की अतिरिक्त क्षमता प्रदान करेगी।

इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त और मजबूत होगी।

भारत की सुरक्षा व्यवस्था में नया अध्याय

DRDO के सफल परीक्षणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल मिसाइल निर्माण में ही नहीं, बल्कि उन्हें रोकने और नष्ट करने वाली अत्याधुनिक रक्षा तकनीक में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकती है, जो भविष्य में किसी भी लंबी दूरी के मिसाइल खतरे का प्रभावी जवाब देने में सक्षम होगी।

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