Chennai | India: मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए माना है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार मौजूद है और जजों को “पवित्र गाय” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, जिन्हें आलोचना या सवालों से ऊपर माना जाए। कोर्ट की यह टिप्पणी देशभर में न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ रही है।
यह टिप्पणी जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। याचिका में तमिल फिल्म ‘करुप्पु’ पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि फिल्म में न्यायपालिका की नकारात्मक छवि दिखाई गई है, जिससे लोगों का अदालतों पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और फिल्मों या कला के माध्यम से न्यायपालिका समेत किसी भी संस्था की आलोचना को पूरी तरह गलत नहीं माना जा सकता।
‘There Is Corruption In Judiciary’: Madras HC Says Judges Need Not Be Treated As ‘Holy Cows’https://t.co/D4HwG0M6jM#MadrasHC #Judiciary #JudicialSystem #Justice #Law
— News18 (@CNNnews18) May 28, 2026
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि “कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है।” अदालत ने यह भी माना कि “भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं।” कोर्ट की यह स्वीकारोक्ति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार पर खुलकर टिप्पणी बहुत कम देखने को मिलती है।
खंडपीठ ने कहा कि जज आलोचना से ऊपर नहीं हैं और लोकतंत्र में जनता को न्यायपालिका पर सवाल उठाने का अधिकार है। अदालत ने ब्रिटिश न्यायविद लॉर्ड एटकिन की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को आम नागरिकों की आलोचना और जांच का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
There Is Corruption In Judiciary, Judges Need Not Be Treated As Holy Cows: Madras High Court |@UpasanaSajeev #MadrasHighCourt https://t.co/iUpMb96hzZ
— Live Law (@LiveLawIndia) May 27, 2026
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अकेले संभव नहीं होता, इसमें कुछ वकीलों या अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि, अदालत ने भरोसा दिलाया कि हाईकोर्ट समय-समय पर ऐसे “काले भेड़ों” की पहचान कर कार्रवाई करता रहता है।
मद्रास हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद न्यायिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका के भीतर से आई ऐसी स्पष्ट टिप्पणी सुधार की जरूरत को और मजबूती देती है।
None can deny that there is corruption in the judiciary, the Madras High Court recently observed while refusing to ban Karuppu, a Tamil film which involves a portrayal of corruption in a trial court.
Read the judgment: https://t.co/Fiuyyf0nhN pic.twitter.com/uswehuxgZM
— Bar and Bench (@barandbench) May 27, 2026
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों की गलत हरकतों के आधार पर पूरी न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने कहा कि संस्थागत सुधार और आत्मनियंत्रण की व्यवस्था ही न्याय व्यवस्था की मजबूती बनाए रखती है।

