म्यांमार (Myanmar)में लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची (Aung San Suu Kyi) के 81वें जन्मदिन पर उनकी और हजारों राजनीतिक बंदियों की तत्काल रिहाई की मांग तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र, आसियान सांसदों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उनकी सेहत व मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई है।
म्यांमार (Myanmar) की लोकतंत्र समर्थक नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची (Aung San Suu Kyi) ने 19 जून 2026 को अपना 81वां जन्मदिन हिरासत में मनाया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, सांसदों, मानवाधिकार संगठनों, राजनयिकों, लोकतंत्र समर्थकों तथा देश-विदेश में रह रहे म्यांमार के नागरिकों ने उनकी तथा देश की विभिन्न जेलों में बंद हजारों राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग तेज कर दी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सू ची की सेहत पर चिंता जताते हुए म्यांमार में जारी सामाजिक-राजनीतिक संकट के समाधान के लिए समावेशी राजनीतिक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। लगभग 5.5 करोड़ आबादी वाले इस बौद्ध-बहुल देश में फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से अस्थिरता और हिंसा का दौर जारी है।
सू ची ने अपना जन्मदिन राजधानी नेपीडॉ में किसी अज्ञात स्थान पर बिताया। इस दौरान जुंटा-विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक सभाएं आयोजित कर एकजुटता का प्रदर्शन किया और दोहराया कि सू ची आज भी म्यांमार में लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का सबसे सशक्त प्रतीक हैं।
आसियान सांसदों का खुला पत्र
सू ची की रिहाई की मांग को बल देते हुए आसियान पार्लियामेंटेरियंस फॉर ह्यूमन राइट्स (APHR) से जुड़े 134 वर्तमान और पूर्व सांसदों ने एक खुला पत्र जारी किया। इन सांसदों का संबंध ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, इटली, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और फिलीपींस समेत कई देशों से है।
पत्र में सू ची और अन्य राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई के साथ-साथ उनकी स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र जांच और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई है।
आसियान 2026 के अध्यक्ष तथा फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर और सदस्य देशों को संबोधित पत्र में कहा गया है कि यदि आसियान क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करना चाहता है, तो उसे म्यांमार संकट के समाधान के लिए अधिक प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
हजारों मौतें और व्यापक दमन
सैन्य प्रमुख एवं वर्तमान राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के नेतृत्व में हुए 1 फरवरी 2021 के तख्तापलट के बाद से हालात लगातार बिगड़ते गए हैं। लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों सहित कम से कम 7,800 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 31,100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 22,000 से ज्यादा लोग अभी भी हिरासत में हैं।
लाखों लोग विस्थापित होकर अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जहां वे गरीबी, असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने हिरासत केंद्रों में यातना, दुर्व्यवहार, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और अन्य अमानवीय व्यवहार की लगातार शिकायतें दर्ज की हैं।
सू ची की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सबसे बड़ी चिंता सू ची की स्वास्थ्य स्थिति और उनके वर्तमान ठिकाने को लेकर है। तख्तापलट के दिन से हिरासत में रखी गईं सू ची को अप्रैल 2026 में कथित तौर पर जेल से हटाकर कहीं नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
हालांकि न तो उनके परिवार, न ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। ऐसे में उनकी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और उनके जीवित होने के स्वतंत्र प्रमाण की मांग लगातार तेज हो रही है।
बेटे किम एरिस की भावुक अपील
सू ची के पुत्र किम एरिस, जो ब्रिटेन के नागरिक हैं, ने भी एक अंतरराष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। उन्होंने विभिन्न सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी मां जीवित हैं और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।
एरिस ने कहा कि तख्तापलट के बाद से उनकी मां ने हिरासत में अपना छठा जन्मदिन मनाया है। उन्होंने उनके ठिकाने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि परिवार और कानूनी सलाहकारों से वर्षों से दूरी ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
AAPP और संयुक्त राष्ट्र भी सक्रिय
असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स (AAPP) ने भी सू ची और सभी राजनीतिक बंदियों की बिना शर्त एवं तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। संगठन के अनुसार, 1980 के दशक के उत्तरार्ध में राजनीति में प्रवेश करने के बाद से सू ची लगभग दो दशक जेल या नजरबंदी में बिता चुकी हैं, जिससे वे दुनिया की सबसे लंबे समय तक हिरासत में रखी गई राजनीतिक नेताओं में शामिल हो गई हैं।
म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत जूली बिशप ने भी सू ची की रिहाई का मुद्दा कई बार म्यांमार प्रशासन के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि पूर्व स्टेट काउंसलर के बारे में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) ने नवंबर 2020 के आम चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी, जिसके कुछ ही महीनों बाद सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ा
तख्तापलट के बाद गठित नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (NUG), यूरोपीय संघ तथा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और नीदरलैंड के राजनयिक मिशनों ने भी सू ची की बिना शर्त रिहाई की मांग का समर्थन किया है।
इन देशों और संगठनों ने म्यांमार प्रशासन से आग्रह किया है कि वह सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करे तथा सू ची को स्वतंत्र चिकित्सा सहायता, परिवारजनों और कानूनी सलाहकारों से मिलने की अनुमति प्रदान करे।
नेशनल यूनिटी कंसल्टेटिव काउंसिल (NUCC) ने भी अपने बयान में इन मांगों का समर्थन करते हुए म्यांमार के लोगों के संघर्ष और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की सराहना की। परिषद ने कहा कि “स्वर्णिम पैगोडाओं की भूमि” के लोग आज भी संघीय लोकतंत्र, समानता, न्याय और स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई मामलों के विश्लेषक हैं।)


