WMO की बड़ी चेतावनी: लौट रहा है El Niño (एल नीनो), India में कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और जल संकट का खतरा

WMO की बड़ी चेतावनी: लौट रहा है El Niño (एल नीनो), India में कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और जल संकट का खतरा
79 / 100 SEO Score

 

WMO की बड़ी चेतावनी: लौट रहा है El Niño (एल नीनो), India में कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और जल संकट का खतरा

 

Geneva/New Delhi: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने एल नीनो (El Niño) के संभावित लौटने को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी की है। संगठन का कहना है कि 2026 में एल नीनो के सक्रिय होने से दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा, खाद्य संकट और जल संकट जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही भारत में मानसून पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी के अनुसार, 2026 के मध्य तक एल नीनो की स्थिति विकसित होने और वर्ष के उत्तरार्ध में इसके और मजबूत होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह अनुमान सही साबित हुआ तो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ मिलकर यह वैश्विक तापमान को नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा सकता है।

क्या है एल नीनो?

एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ जाने पर उत्पन्न होती है। यह एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) चक्र का हिस्सा है, जो हर दो से सात वर्ष के अंतराल पर दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है।

हालांकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इसके प्रभाव पहले की तुलना में अधिक गंभीर और व्यापक होते जा रहे हैं।

बढ़ सकता है वैश्विक तापमान

WMO ने चेतावनी दी है कि एल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में और वृद्धि हो सकती है। हाल के वर्षों में दुनिया ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का अनुभव किया है और विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो इस प्रवृत्ति को और तेज कर सकता है।

इससे विभिन्न देशों में लंबी और तीव्र हीटवेव, जंगलों में आग, जल संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से विकासशील देशों की कमजोर आबादी पर इसका सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे का संकट

एल नीनो के कारण दुनिया भर में वर्षा के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दक्षिण अमेरिका, पूर्वी अफ्रीका, मध्य एशिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, दक्षिणी अफ्रीका और मध्य अमेरिका के कई क्षेत्रों में वर्षा कम होने के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसका सीधा असर कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है।

खाद्य और जल सुरक्षा पर खतरा

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सूखा, अत्यधिक वर्षा और बढ़ता तापमान फसलों की पैदावार घटा सकते हैं, जिससे खाद्यान्न की कीमतों में वृद्धि और खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।

जल संकट पहले से झेल रहे क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि कम वर्षा और बढ़ते तापमान से जल स्रोतों पर दबाव बढ़ेगा।

WMO की बड़ी चेतावनी: लौट रहा है El Niño (एल नीनो), India में कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और जल संकट का खतरा

भारत के लिए क्यों चिंता का विषय है एल नीनो?

भारत में एल नीनो का सबसे बड़ा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। इतिहास बताता है कि कई एल नीनो वर्षों में देश को सामान्य से कम वर्षा का सामना करना पड़ा है। यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

यदि एल नीनो मानसून के दौरान मजबूत होता है, तो देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी देखी जा सकती है। इससे खेती-किसानी, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

भारत की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी वर्षा आधारित है। ऐसे में मानसून कमजोर पड़ने पर धान, दलहन, तिलहन और अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।

कम उत्पादन का असर किसानों की आय पर पड़ेगा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहा तो महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।

बढ़ सकती हैं हीटवेव और जल संकट की चुनौतियां

एल नीनो के दौरान भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जाता है। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में भीषण गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

कम बारिश होने की स्थिति में जलाशयों का स्तर घट सकता है, भूजल पुनर्भरण प्रभावित हो सकता है और कई राज्यों में पेयजल संकट गहरा सकता है। इससे कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ेगा।

WMO की बड़ी चेतावनी: लौट रहा है El Niño (एल नीनो), India में कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और जल संकट का खतरा

सरकार और एजेंसियां सतर्क

संभावित जोखिमों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन, फसल विविधीकरण और आपदा तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

हालांकि मौसम वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल एल नीनो ही भारतीय मानसून को प्रभावित नहीं करता। हिंद महासागर की परिस्थितियां, क्षेत्रीय वायुमंडलीय गतिविधियां और अन्य जलवायु कारक भी मानसून की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समय रहते तैयारी की जरूरत

WMO ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करें, जलवायु अनुकूलन उपायों को बढ़ावा दें और आपदा प्रबंधन तंत्र को अधिक प्रभावी बनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का संयुक्त प्रभाव आने वाले वर्षों में दुनिया के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। ऐसे में समय रहते तैयारी और वैज्ञानिक रणनीति ही इन जोखिमों से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *