खेती नहीं, फिर भी करोड़ों की Agricultural Income ! ISRO की सैटेलाइट और Income Tax Dept ने खोला ₹2,038 करोड़ का टैक्स घोटाला

खेती नहीं, फिर भी करोड़ों की Agricultural Income ! ISRO की सैटेलाइट और Income Tax Dept ने खोला ₹2,038 करोड़ का टैक्स घोटाला
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ISRO की सैटेलाइट नजर से बच न सके ‘फर्जी किसान’; बिना जमीन 310 अमीरों ने दिखा दी करोड़ों की खेती!

 

News Desk: आयकर विभाग (Income Tax Department) ने एक बड़े टैक्स चोरी नेटवर्क का खुलासा करते हुए ऐसे 310 अमीर लोगों की पहचान की है, जिन्होंने अपने आयकर रिटर्न में करोड़ों रुपये की कृषि आय (Agriculture Income) दिखाकर टैक्स छूट का फायदा उठाया, जबकि उनके नाम पर एक इंच भी कृषि भूमि नहीं पाई गई। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने मिलकर करीब ₹2,038 करोड़ के टैक्स की कथित चोरी की।

इस पूरे मामले का खुलासा अत्याधुनिक डेटा एनालिटिक्स और Indian Space Research Organisation (ISRO) की सैटेलाइट मैपिंग तकनीक की मदद से हुआ। Central Board of Direct Taxes (CBDT) और आयकर विभाग ने Assessment Year 2021-22 से 2023-24 तक दाखिल किए गए संदिग्ध रिटर्न की गहन जांच की।

बिना जमीन बने ‘करोड़पति किसान’

जांच एजेंसियों के अनुसार, कई लोगों ने अपने ITR में ₹50 लाख से लेकर ₹400 करोड़ तक की कृषि आय घोषित की, लेकिन भूमि रिकॉर्ड में उनके पास कोई कृषि जमीन नहीं मिली। कई मामलों में खेती से जुड़े दस्तावेज और रसीदें भी फर्जी पाए गए।

अधिकारियों का कहना है कि कृषि आय पर मिलने वाली टैक्स छूट का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि रियल एस्टेट डील, जमीन बिक्री और अन्य कारोबारी आय को कृषि आय के रूप में दिखाया गया ताकि टैक्स से बचा जा सके।

ऐसे किया गया टैक्स चोरी का खेल

आयकर विभाग की जांच में कई तरीके सामने आए—

  • बिल्डरों और डेवलपर्स को जमीन बेचने से हुए मुनाफे को कृषि आय बताया गया।
  • छिपाई गई आय और काले धन को खेती की कमाई दिखाकर वैध बनाने की कोशिश हुई।
  • गैर-कृषि व्यवसाय से होने वाली कमाई को कृषि आय के तहत दर्शाया गया।
  • कई मामलों में खेती का कोई वास्तविक प्रमाण नहीं मिला।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने खुद को असली किसान साबित करने के लिए नकली कृषि दस्तावेज तक तैयार कर लिए थे।

ISRO की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी बनी बड़ा हथियार

इस पूरे ऑपरेशन में आयकर विभाग ने “SAKSHAM” प्रोजेक्ट के तहत डेटा एनालिटिक्स और ISRO की सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए यह जांचा गया कि जिन जमीनों पर खेती का दावा किया गया, वहां वास्तव में कृषि गतिविधियां हो भी रही थीं या नहीं।

सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने इन 310 टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी कर रिटर्न अपडेट करने और बकाया टैक्स जमा करने को कहा है।

सरकार सख्त, लेकिन असली किसानों को राहत

अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई छोटे और वास्तविक किसानों के खिलाफ नहीं है। सरकार का फोकस उन बड़े लोगों पर है जो कृषि आय छूट का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का टैक्स बचा रहे हैं।

कृषि संगठनों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े से असली किसानों की छवि प्रभावित होती है और कृषि क्षेत्र को मिलने वाली राहत योजनाओं पर सवाल खड़े होते हैं।

टैक्स सिस्टम में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले ने कृषि आय छूट व्यवस्था में मौजूद कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अब सरकार कृषि आय से जुड़े दावों की निगरानी और सत्यापन प्रणाली को और सख्त बना सकती है।

आयकर विभाग की यह कार्रवाई हाल के वर्षों में तकनीक और सैटेलाइट डेटा की मदद से पकड़े गए सबसे बड़े टैक्स फ्रॉड मामलों में से एक मानी जा रही है।

Ashis Sinha

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