भारत में नया लेबर कोड (Labour Code) लागू: अब हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करने का विकल्प
भारत के नए लेबर कोड (New Labour Code) में कर्मचारियों को 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का विकल्प मिल सकता है। जानिए नए नियमों में सैलरी (Salary), PF, ओवरटाइम और वर्किंग आवर्स से जुड़े बड़े बदलाव।
देश के कामकाजी माहौल में बड़ा बदलाव
भारत में लागू होने जा रहे नए लेबर कोड (Labour Code) के तहत अब कर्मचारियों को हफ्ते में चार दिन काम करने का विकल्प मिल सकता है। केंद्र सरकार के इस बड़े श्रम सुधार का मकसद पुराने श्रम कानूनों को सरल बनाना, कंपनियों को अधिक लचीलापन देना और कर्मचारियों के लिए नई सुविधाएं सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के मुताबिक कर्मचारी यदि चाहें तो 48 घंटे का साप्ताहिक काम सिर्फ चार दिनों में पूरा कर सकते हैं। यानी उन्हें रोज करीब 12 घंटे काम करना होगा, लेकिन बदले में तीन दिन की छुट्टी मिल सकती है।
चार दिन का वर्क वीक अनिवार्य नहीं
सरकार ने साफ किया है कि चार दिन का वर्क वीक सभी कंपनियों पर लागू नहीं होगा। यह पूरी तरह कंपनियों और कर्मचारियों की आपसी सहमति और काम की जरूरतों पर निर्भर करेगा।
कई कंपनियां पहले की तरह पांच या छह दिन वाला वर्क मॉडल भी जारी रख सकती हैं।
29 पुराने कानूनों की जगह आएंगे 4 नए कोड
सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड बनाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- वेतन संहिता (Code on Wages)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता
सरकार का कहना है कि इससे उद्योगों को राहत मिलेगी और कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।
सैलरी स्ट्रक्चर और PF में बदलाव
नए नियमों के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी होगा। इसका असर कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा।
PF और रिटायरमेंट लाभ बढ़ सकते हैं, लेकिन कई कर्मचारियों की हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी कुछ कम हो सकती है।
ओवरटाइम के नियम भी सख्त
नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकेगा। इससे अधिक काम कराने पर कंपनियों को ओवरटाइम देना होगा।
ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन से दोगुना देने का प्रावधान किया गया है।
IT और स्टार्टअप सेक्टर में जल्दी दिख सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि IT, स्टार्टअप, डिजिटल सर्विस और कॉर्पोरेट सेक्टर सबसे पहले चार दिन वाले वर्क मॉडल को अपना सकते हैं।
हालांकि मैन्युफैक्चरिंग और फैक्ट्री आधारित उद्योगों में इसे लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि वहां लगातार उत्पादन बनाए रखना जरूरी होता है।
ट्रेड यूनियनों ने जताई चिंता
जहां उद्योग जगत इन सुधारों का स्वागत कर रहा है, वहीं कई ट्रेड यूनियनों ने इसका विरोध भी किया है।
यूनियनों का कहना है कि रोज 12 घंटे काम करने से कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ सकता है, भले ही उन्हें अतिरिक्त छुट्टी मिले।
राज्यों की मंजूरी के बाद होगा पूरा लागू
हालांकि केंद्र सरकार ने नए लेबर कोड को नोटिफाई कर दिया है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करने के लिए राज्यों की मंजूरी और अधिसूचना भी जरूरी होगी।
इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में इसके लागू होने की रफ्तार अलग हो सकती है।


